दिल अपना इन्हीं बातों से उठ जाता है तुझ से
जा बैठे है तू मिल को जो हर ना-कस-ओ-कस में
मीर हसन
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दिल 'हसन' ऐसे गुम हुए कि सदा
एक को एक का सुराग़ रहा
मीर हसन
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दिल को किस बू-क़लमूँ जल्वे ने है ख़ून किया
अश्क आँखों से जो ये रंग-ब-रंग आते हैं
मीर हसन
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दिल-ओ-जाँ जो हैं ये सो अपने नहीं
समझते हैं इन को तो हम आप का
मीर हसन
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दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था
जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था
मीर हसन
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दुनिया है सँभल के दिल लगाना
याँ लोग अजब अजब मिलेंगे
मीर हसन
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एक दम भी मिला न हम को क़रार
इस दिल-ए-बे-क़रार के हाथों
मीर हसन
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