आश्ना बेवफ़ा नहीं होता
बेवफ़ा आश्ना नहीं होता
मीर हसन
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अब जो छूटे भी हम क़फ़स से तो क्या
हो चुकी वाँ बहार ही आख़िर
मीर हसन
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अपने कहने में तो दिल मुतलक़ नहीं किस से कहें
क्या करें ऐ नासेहो कुछ तो करो इरशाद तुम
मीर हसन
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असर होवे न होवे पर बला से जी तो बहलेगा
निकाला शग़्ल तन्हाई में मैं नाचार रोने का
मीर हसन
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और कुछ तोहफ़ा न था जो लाते हम तेरे नियाज़
एक दो आँसू थे आँखों में सो भर लाएँ हैं हम
मीर हसन
बंदा बुतों का किस के कहे से हुआ ये दिल
हक़ की तरफ़ से क्या उसे इल्हाम कुछ हुआ
मीर हसन
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बस अब चौपड़ उठाओ और कुछ बातें करें साहब
जो मैं जीता तो तुम जीते जो तुम हारे तो मैं हारा
मीर हसन
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