यूँ आग में से भाग निकलना नज़र बचा
अपने तईं तो वज़्अ' न भाई शरार की
मीर असर
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यूँ ख़ुदा की ख़ुदाई बर-हक़ है
पर 'असर' की हमें तो आस नहीं
मीर असर
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आईना ही को कब तईं दिखलाओगे जमाल
बाहर खड़े हैं कितने और उम्मीद-वार भी
मीर हसन
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आबाद गर वो चाहे दिल को तो कर सके है
मंज़ूर है पर इस को मेरा ख़राब रखना
मीर हसन
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आह क्या शिकवा करूँ मैं हाथ से उस के हिना
जब हुई मेरे लहू की रंग तब धोने लगा
मीर हसन
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आह ताज़ीम को उठती है मिरे सीने से
दिल पे जब उस की निगाहों के ख़दंग आते हैं
मीर हसन
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आसाँ न समझियो तुम नख़वत से पाक होना
इक उम्र खो के हम ने सीखा है ख़ाक होना
मीर हसन
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