राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में
और खुल जाएँगे दो-चार मुलाक़ातों में
मीर असर
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रक़ीब देख सँभल कर के सामने आना
बरहना तेग़ हैं इक दस्त-ए-रोज़गार में हम
मीर असर
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तेरे आने का एहतिमाल रहा
मरते मरते भी ये ख़याल रहा
मीर असर
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तू ही बेहतर है आइना हम से
हम तो इतने भी रू-शनास नहीं
मीर असर
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तू कहाँ मैं कहाँ प कहते हैं
कि ये आपस में दोनों रहते हैं
मीर असर
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उस संग-दिल के दिल में तो नाले ने जा न की
क्या फ़ाएदा जो और के जी में असर किया
मीर असर
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यार ग़ुस्सा तिरी बला खावे
काम निकले जो मुस्कुराने से
मीर असर
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