काम तुझ से अभी तो साक़ी है
कि ज़रा हम को होश बाक़ी है
मीर असर
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किन ने कहा और से न मिल तू
पर हम से भी कभू मिला कर
मीर असर
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कुछ न लिक्खा न पढ़ा हूँ वले हूँ मअ'नी-शनास
मुद्दआ तेरा समझता हूँ इबारात से मैं
मीर असर
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क्या कहूँ किस तरह से जीता हूँ
ग़म को खाता हूँ आँसू पीता हूँ
मीर असर
लिया है दिल ही फ़क़त और जान बाक़ी है
अभी तो काम तुम्हें मेहरबान बाक़ी है
मीर असर
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न कहा जाए कि दुश्मन न कहा जाए कि दोस्त
कुछ समझ में नहीं आता है 'असर' कौन है वो
मीर असर
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पहले सौ बार इधर उधर देखा
जब तुझे डर के इक नज़र देखा
मीर असर
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