वो मिरे साथ है साए की तरह
दिल की ज़िद है कि नज़र भी आए
महमूद अयाज़
वो नहीं है न सही तर्क-ए-तमन्ना न करो
दिल अकेला है इसे और अकेला न करो
महमूद अयाज़
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मैं आ गया हूँ वहाँ तक तिरी तमन्ना में
जहाँ से कोई भी इम्कान-ए-वापसी न रहे
महमूद गज़नी
दूर से तकते रहे नंगे बदन
हो गए शो-केस में मैले लिबास
महमूद इश्क़ी
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फ़िक्रों को चीरते हुए तेरे ख़याल ने
टूटे हुए बदन में नया दिल लगा दिया
महमूद इश्क़ी
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ख़ुशबू की तरह शब को मचलता था गुल-बदन
बिस्तर से चुन रहा हूँ मैं टूटे हुए बटन
महमूद इश्क़ी
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मुँह छुपाए जवाब फिरते हैं
सर उठा कर खड़े हुए हैं सवाल
महमूद इश्क़ी
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