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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

वो लाला-बदन झील में उतरा नहीं वर्ना
शो'ले मुतवातिर इसी पानी से निकलते

महफूजुर्रहमान आदिल




वो मिरी आवारागर्दी वो मिरा दीवाना-पन
वो मिरी तअ'ज़ीम में दीवार-ओ-दर का जागना

महफूजुर्रहमान आदिल




ये भी है मारा हुआ साक़ी की चश्म-ए-नाज़ का
इस लिए 'आदिल' को शीशे की परी अच्छी लगी

महफूजुर्रहमान आदिल




ज़िंदगी को हौसला देने के ख़ातिर
ख़्वाहिशों को रेज़ा रेज़ा चुन रहा हूँ

महफूजुर्रहमान आदिल




अगर ख़मोश रहूँ मैं तो तू ही सब कुछ है
जो कुछ कहा तो तिरा हुस्न हो गया महदूद

माहिर-उल क़ादरी




अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए

माहिर-उल क़ादरी




इक बार तुझे अक़्ल ने चाहा था भुलाना
सौ बार जुनूँ ने तिरी तस्वीर दिखा दी

माहिर-उल क़ादरी