उस ने भी कई रोज़ से ख़्वाहिश नहीं ओढ़ी
मैं ने भी कई दिन से इरादा नहीं पहना
इक़बाल साजिद
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वो बोलता था मगर लब नहीं हिलाता था
इशारा करता था जुम्बिश न थी इशारे में
इक़बाल साजिद
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वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा
किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
इक़बाल साजिद
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ये तिरे अशआर तेरी मानवी औलाद हैं
अपने बच्चे बेचना 'इक़बाल-साजिद' छोड़ दे
इक़बाल साजिद
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आशोब-ए-इज़्तिराब में खटका जो है तो ये
ग़म तेरा मिल न जाए ग़म-ए-रोज़गार में
इक़बाल सुहैल
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हुस्न-ए-फ़ितरत की आबरू मुझ से
आब ओ गिल में है रंग-ओ-बू मुझ से
इक़बाल सुहैल
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जो तसव्वुर से मावरा न हुआ
वो तो बंदा हुआ ख़ुदा न हुआ
इक़बाल सुहैल
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