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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हाँ ख़ुदा है, इस में कोई शक की गुंजाइश नहीं
इस से तुम ये मत समझ लेना ख़ुदा मौजूद है

इरफ़ान सत्तार




हर एक रंज उसी बाब में किया है रक़म
ज़रा सा ग़म था जिसे बे-पनाह मैं ने किया

इरफ़ान सत्तार




इक चुभन है कि जो बेचैन किए रहती है
ऐसा लगता है कि कुछ टूट गया है मुझ में

इरफ़ान सत्तार




इस में नहीं है दख़्ल कोई ख़ौफ़ ओ हिर्स का
इस की जज़ा, न इस की सज़ा है, ये इश्क़ है

इरफ़ान सत्तार




जो अक़्ल से बदन को मिली थी, वो थी हवस
जो रूह को जुनूँ से मिला है, ये इश्क़ है

इरफ़ान सत्तार




किस अजब साअत-ए-नायाब में आया हुआ हूँ
तुझ से मिलने मैं तिरे ख़्वाब में आया हुआ हूँ

इरफ़ान सत्तार




किसी आहट में आहट के सिवा कुछ भी नहीं अब
किसी सूरत में सूरत के सिवा क्या रह गया है

इरफ़ान सत्तार