यहाँ से चारों तरफ़ रास्ते निकलते हैं
ठहर ठहर के हम इस ख़्वाब से निकलते हैं
इदरीस बाबर
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ये किरन कहीं मिरे दिल में आग लगा न दे
ये मुआइना मुझे सरसरी नहीं लग रहा
इदरीस बाबर
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अगर वो चाँद की बस्ती का रहने वाला था
तो अपने साथ सितारों का क़ाफ़िला रखता
इफ़्फ़त ज़र्रीं
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देख कर इंसान की बेचारगी
शाम से पहले परिंदे सो गए
इफ़्फ़त ज़र्रीं
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कौन पहचानेगा 'ज़र्रीं' मुझ को इतनी भीड़ में
मेरे चेहरे से वो अपनी हर निशानी ले गया
इफ़्फ़त ज़र्रीं
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पत्थर के जिस्म मोम के चेहरे धुआँ धुआँ
किस शहर में उड़ा के हवा ले गई मुझे
इफ़्फ़त ज़र्रीं
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वो मिल गया तो बिछड़ना पड़ेगा फिर 'ज़र्रीं'
इसी ख़याल से हम रास्ते बदलते रहे
इफ़्फ़त ज़र्रीं
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