तमाम दोस्त अलाव के गिर्द जम्अ थे और
हर एक अपनी कहानी सुनाने वाला था
इदरीस बाबर
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तू भी हो मैं भी हूँ इक जगह पे और वक़्त भी हो
इतनी गुंजाइशें रखती नहीं दुनिया मिरे दोस्त!
इदरीस बाबर
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टूट सकता है छलक सकता है छिन सकता है
इतना सोचे तो कोई जाम उछाले कैसे
इदरीस बाबर
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वही ख़्वाब है वही बाग़ है वही वक़्त है
मगर इस में उस के बग़ैर जी नहीं लग रहा
इदरीस बाबर
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वही न हो कि ये सब लोग साँस लेने लगें
अमीर-ए-शहर कोई और ख़ौफ़ तारी कर
इदरीस बाबर
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वो बहुत दूर है मगर मिरे पास
एक ही सम्त का कराया है
इदरीस बाबर
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वो मुझे देख कर ख़मोश रहा
और इक शोर मच गया मुझ में
इदरीस बाबर
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