EN اردو
फ़ुज़ैल जाफ़री शायरी | शाही शायरी

फ़ुज़ैल जाफ़री शेर

23 शेर

कोई मंज़िल आख़िरी मंज़िल नहीं होती 'फ़ुज़ैल'
ज़िंदगी भी है मिसाल-ए-मौज-ए-दरिया राह-रौ

फ़ुज़ैल जाफ़री




किस दर्द से रौशन है सियह-ख़ाना-ए-हस्ती
सूरज नज़र आता है हमें रात गए भी

फ़ुज़ैल जाफ़री




जो भर भी जाएँ दिल के ज़ख़्म दिल वैसा नहीं रहता
कुछ ऐसे चाक होते हैं जो जुड़ कर भी नहीं सिलते

फ़ुज़ैल जाफ़री




आठों पहर लहू में नहाया करे कोई
यूँ भी न अपने दर्द को दरिया करे कोई

फ़ुज़ैल जाफ़री




हर आदमी में थे दो चार आदमी पिन्हाँ
किसी को ढूँडने निकला कोई मिला मुझ को

फ़ुज़ैल जाफ़री




घर से बाहर नहीं निकला जाता
रौशनी याद दिलाती है तिरी

फ़ुज़ैल जाफ़री




एहसास-ए-जुर्म जान का दुश्मन है 'जाफ़री'
है जिस्म तार तार सज़ा के बग़ैर भी

फ़ुज़ैल जाफ़री




दिल यूँ तो गाह गाह सुलगता है आज भी
मंज़र मगर वो रक़्स-ए-शरर का नहीं रहा

फ़ुज़ैल जाफ़री




दश्त-ए-तन्हाई में जीने का सलीक़ा सीखिए
ये शिकस्ता बाम-ओ-दर भी हम-सफ़र हो जाएँगे

फ़ुज़ैल जाफ़री