ज़िंदगी नाम है जुदाई का
आप आए तो मुझ को याद आया
I was reminded when you came
that life and parting are the same
नरेश कुमार शाद
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है
the river's raging is advised by the tranquil sea
the greater power you possess, the quieter you be
नातिक़ लखनवी
मय-कशो मय की कमी बेशी पे नाहक़ जोश है
ये तो साक़ी जानता है किस को कितना होश है
ye who drink, needlessly, argue about the quantity
the maiden knows as she pours, each person's sobriety
नातिक़ लखनवी
जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो
from their beloved separated none should be
such a fate should not befall even my enemy
नज़ीर अकबराबादी
मय भी है मीना भी है साग़र भी है साक़ी नहीं
दिल में आता है लगा दें आग मय-ख़ाने को हम
there is the wine, the glass, the flask, but no one to pour
I feel like burning down the tavern on this very score
नज़ीर अकबराबादी
एक दीवाने को जो आए हैं समझाने कई
पहले मैं दीवाना था और अब हैं दीवाने कई
in a madman, people come, to sanity imbue
I was the only lunatic, now there're quite a few
नज़ीर बनारसी
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे
let the hands of innocents reach out for stars and moon
with education they'd become like us so very soon
निदा फ़ाज़ली