जो पलकों से गिर जाए आँसू का क़तरा
जो पलकों में रह जाएगा वो गुहर है
फ़व्वाद अहमद
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रूठे लोगों को मनाने में मज़ा आता है
जान कर आप को नाराज़ किया है मैं ने
फ़व्वाद अहमद
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तुम मुझे छोड़ के इस तरह नहीं जा सकते
इस तअ'ल्लुक़ पे बहुत नाज़ किया है मैं ने
फ़व्वाद अहमद
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वो जिस का नाम पड़ा है ख़मोश लोगों में
यहाँ पे लफ़्ज़ों के दरिया बहा रहा था अभी
फ़व्वाद अहमद
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अब के रूठे तो मनाने नहीं आया कोई
बात बढ़ जाए तो हो जाती है कम आप ही आप
फ़े सीन एजाज़
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अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती है
दूसरी औरत पहली जैसी कब होती है
फ़े सीन एजाज़
हज़ारों साल की थी आग मुझ में
रगड़ने तक मैं इक पत्थर रहा था
फ़े सीन एजाज़
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