सुन रहे हैं कान जो कहते हैं सब
लोग लेकिन सोचते कुछ और हैं
फ़ातिमा हसन
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सुनती रही मैं सब के दुख ख़ामोशी से
किस का दुख था मेरे जैसा भूल गई
फ़ातिमा हसन
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ठेस कुछ ऐसी लगी है कि बिखरना है उसे
दिल में धड़कन की जगह दर्द है और जान नहीं
फ़ातिमा हसन
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उलझ के रह गए चेहरे मिरी निगाहों में
कुछ इतनी तेज़ी से बदले थे उन की बात के रंग
फ़ातिमा हसन
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उस के प्याले में ज़हर है कि शराब
कैसे मालूम हो बग़ैर पिए
फ़ातिमा हसन
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बे-कैफ़ कट रही थी मुसलसल ये ज़िंदगी
फिर ख़्वाब में वो ख़्वाब सा पैकर मिला मुझे
फ़व्वाद अहमद
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दिल ओ नज़र की बक़ा है फ़क़त मोहब्बत में
दिल ओ नज़र से कोई और काम मत लेना
फ़व्वाद अहमद
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