जब तक कि हैं ज़माने में हम से ख़राब लोग
मस्जिद कहीं कहीं कोई मय-ख़ाना चाहिए
अंजुम रूमानी
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किस की जबीं पे हैं ये सितारे अरक़ अरक़
किस के लहू से चाँद का दामन है दाग़ दाग़
अंजुम रूमानी
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किसी भी हाल में राज़ी नहीं है दिल हम से
हर इक तरह का ये काफ़िर बहाना रखता है
अंजुम रूमानी
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किसी भी हाल में राज़ी नहीं है दिल हम से
हर इक तरह का ये काफ़िर बहाना रखता है
अंजुम रूमानी
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मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए
ताज़ा हवा पे बंद न दरवाज़ा कीजिए
अंजुम रूमानी
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नई ज़िंदगी के नए मक्र ओ फ़न
नए आदमी की नई चाल-ढाल
अंजुम रूमानी
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पाप करो जी खोल कर धब्बों की क्या सोच
जब जी चाहा धो लिए गंगा-जल के साथ
अंजुम रूमानी
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