बुझने दे सब दिए मुझे तन्हाई चाहिए
कुछ देर के लिए मुझे तन्हाई चाहिए
अंजुम सलीमी
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चख रहा था मैं इक बदन का नमक
सारे बर्तन खुले पड़े हुए थे
अंजुम सलीमी
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चल तो सकता था मैं भी पानी पर
मैं ने दरिया का एहतिराम किया
अंजुम सलीमी
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दर्द से भरता रहा ज़ात के ख़ाली-पन को
थोड़ा थोड़ा यूँही भरपूर किया मैं ने मुझे
अंजुम सलीमी
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दोस्तो मेरे लिए कोई भी अफ़्सुर्दा न हो
ख़ुश-दिली से दम-ए-रुख़्सत मुझे रुख़्सत किया जाए
अंजुम सलीमी
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एक बे-नाम उदासी से भरा बैठा हूँ
आज दिल खोल के रोने की ज़रूरत है मुझे
अंजुम सलीमी
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एक दिन मेरी ख़ामुशी ने मुझे
लफ़्ज़ की ओट से इशारा किया
अंजुम सलीमी
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