अज़ाँ पे क़ैद नहीं बंदिश-ए-नमाज़ नहीं
हमारे पास तो हिजरत का भी जवाज़ नहीं
अंजुम ख़याली
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बाज़ वादे किए नहीं जाते
फिर भी उन को निभाया जाता है
अंजुम ख़याली
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इस नाम का कोई भी नहीं है
जिस नाम से हम पुकारते हैं
अंजुम ख़याली
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जाँ क़र्ज़ है सो उतारते हैं
हम उम्र कहाँ गुज़ारते हैं
अंजुम ख़याली
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जब तक मैं पहुँचता हूँ कड़ी धूप में चल कर
दीवार का साया पस-ए-दीवार न हो जाए
अंजुम ख़याली
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कहाँ मिला मैं तुझे ये सवाल ब'अद का है
तू पहले याद तो कर किस जगह गँवाया मुझे
अंजुम ख़याली
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कोई तोहमत हो मिरे नाम चली आती है
जैसे बाज़ार में हर घर से गली आती है
अंजुम ख़याली
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