ख़ुद-कुशी करने में भी नाकाम रह जाते हैं हम
कौन अमृत घोल देता है हमारे ज़हर में
अंजुम लुधियानवी
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ख़ुशबुएँ फूट के रोई होंगी
गुल हवाओं में जो बिखरा होगा
अंजुम लुधियानवी
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नींद क्यूँ टूट गई आख़िर-ए-शब
कौन मेरे लिए तड़पा होगा
अंजुम लुधियानवी
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रंग ही से फ़रेब खाते रहें
ख़ुशबुएँ आज़माना भूल गए
अंजुम लुधियानवी
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राह-ए-वफ़ा पर चलने वाले
ये रस्ता वीरान बहुत है
अंजुम लुधियानवी
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सुब्ह का ख़्वाब उम्र भर देखा
और फिर नींद आ गई 'अंजुम'
अंजुम लुधियानवी
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सुनते हैं इक हवा का झोंका
इक ख़ुशबू को ले भागा है
अंजुम लुधियानवी
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