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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

शोर दिन को नहीं सोने देता
शब को सन्नाटा जगा देता है

सैफ़ुद्दीन सैफ़




शोर दिन को नहीं सोने देता
शब को सन्नाटा जगा देता है

सैफ़ुद्दीन सैफ़




थकी थकी सी फ़ज़ाएँ बुझे बुझे तारे
बड़ी उदास घड़ी है ज़रा ठहर जाओ

सैफ़ुद्दीन सैफ़




तुम को बेगाने भी अपनाते हैं मैं जानता हूँ
मेरे अपने भी पराए हैं तुम्हें क्या मालूम

सैफ़ुद्दीन सैफ़




तुम ने दीवाना बनाया मुझ को
लोग अफ़्साना बनाएँगे तुम्हें

सैफ़ुद्दीन सैफ़




तुम ने दीवाना बनाया मुझ को
लोग अफ़्साना बनाएँगे तुम्हें

सैफ़ुद्दीन सैफ़




तुम्हारे ब'अद ख़ुदा जाने क्या हुआ दिल को
किसी से रब्त बढ़ाने का हौसला न हुआ

सैफ़ुद्दीन सैफ़