शोर दिन को नहीं सोने देता
शब को सन्नाटा जगा देता है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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शोर दिन को नहीं सोने देता
शब को सन्नाटा जगा देता है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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थकी थकी सी फ़ज़ाएँ बुझे बुझे तारे
बड़ी उदास घड़ी है ज़रा ठहर जाओ
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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तुम को बेगाने भी अपनाते हैं मैं जानता हूँ
मेरे अपने भी पराए हैं तुम्हें क्या मालूम
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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तुम ने दीवाना बनाया मुझ को
लोग अफ़्साना बनाएँगे तुम्हें
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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तुम ने दीवाना बनाया मुझ को
लोग अफ़्साना बनाएँगे तुम्हें
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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तुम्हारे ब'अद ख़ुदा जाने क्या हुआ दिल को
किसी से रब्त बढ़ाने का हौसला न हुआ
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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