EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

क़रीब-ए-नज़'अ भी क्यूँ चैन ले सके कोई
नक़ाब रुख़ से उठा लो तुम्हें किसी से क्या

सैफ़ुद्दीन सैफ़




क़रीब-ए-नज़'अ भी क्यूँ चैन ले सके कोई
नक़ाब रुख़ से उठा लो तुम्हें किसी से क्या

सैफ़ुद्दीन सैफ़




रात गुज़रे न दर्द-ए-दिल ठहरे
कुछ तो बढ़ जाए कुछ तो घट जाए

सैफ़ुद्दीन सैफ़




'सैफ़' अंदाज़-ए-बयाँ रंग बदल देता है
वर्ना दुनिया में कोई बात नई बात नहीं

सैफ़ुद्दीन सैफ़




'सैफ़' पी कर भी तिश्नगी न गई
अब के बरसात और ही कुछ थी

सैफ़ुद्दीन सैफ़




'सैफ़' पी कर भी तिश्नगी न गई
अब के बरसात और ही कुछ थी

सैफ़ुद्दीन सैफ़




शायद तुम्हारे साथ भी वापस न आ सकें
वो वलवले जो साथ तुम्हारे चले गए

सैफ़ुद्दीन सैफ़