दर्द इतना भी नहीं है कि छुपा भी न सकूँ
बोझ ऐसा भी नहीं है कि उठा भी न सकूँ
साजिद हमीद
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मुंजमिद था लहू रग-ओ-पय में
तेरी आमद हयात ले आई
साजिद हमीद
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राएगाँ हो रही थी तंहाई
तेरी यादों का कारोबार किया
साजिद हमीद
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समझ में वक़्त का आया करिश्मा
नज़र ख़ुद पर जो डाली है दिनों ब'अद
साजिद हमीद
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क्या जाने कब लम्हों की मफ़रूर समाअत लौटे
अच्छी अच्छी आवाज़ों के जाल बिछाते रहना
सज्जाद बाबर
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राह का शजर हूँ मैं और इक मुसाफ़िर तू
दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से
सज्जाद बलूच
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छलकी हर मौज-ए-बदन से हुस्न की दरिया-दिली
बुल-हवस कम-ज़र्फ़ दो चुल्लू में मतवाले हुए
सज्जाद बाक़र रिज़वी
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