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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

घर के बारे में यही जान सका हूँ अब तक
जब भी लौटो कोई दरवाज़ा खुला होता है

सग़ीर मलाल




है एक उम्र से ख़्वाहिश कि दूर जा के कहीं
मैं ख़ुद को अजनबी लोगों के दरमियाँ देखूँ

सग़ीर मलाल




मेरे बारे में जो सुना तू ने
मेरी बातों का एक हिस्सा है

सग़ीर मलाल




मेरे बारे में जो सुना तू ने
मेरी बातों का एक हिस्सा है

सग़ीर मलाल




रौशनी है किसी के होने से
वर्ना बुनियाद तो अंधेरा था

सग़ीर मलाल




सब सवालों के जवाब एक से हो सकते हैं
हो तो सकते हैं मगर ऐसा कहाँ होता है

सग़ीर मलाल




सब सवालों के जवाब एक से हो सकते हैं
हो तो सकते हैं मगर ऐसा कहाँ होता है

सग़ीर मलाल