उन से बचना कि बिछाते हैं पनाहें पहले
फिर यही लोग कहीं का नहीं रहने देते
सग़ीर मलाल
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
उन से बचना कि बिछाते हैं पनाहें पहले
फिर यही लोग कहीं का नहीं रहने देते
सग़ीर मलाल
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
ज़माने भर से उलझते हैं जिस की जानिब से
अकेले-पन में उसे हम भी क्या नहीं कहते
सग़ीर मलाल
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ज़रूरत उस की हमें है मगर ये ध्यान रहे
कहाँ वो ग़ैर-ज़रूरी कहाँ ज़रूरी है
सग़ीर मलाल
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
ज़रूरत उस की हमें है मगर ये ध्यान रहे
कहाँ वो ग़ैर-ज़रूरी कहाँ ज़रूरी है
सग़ीर मलाल
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
बुझ रहे हैं चराग़-ए-दैर-ओ-हरम
दिल जलाओ कि रौशनी कम है
सहाब क़ज़लबाश
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अजीब होते हैं आदाब-ए-रुख़स्त-ए-महफ़िल
कि वो भी उठ के गया जिस का घर न था कोई
सहर अंसारी
टैग:
| बिदाई |
| 2 लाइन शायरी |

