मैं ने जिन के लिए राहों में बिछाया था लहू
हम से कहते हैं वही अहद-ए-वफ़ा याद नहीं
साग़र सिद्दीक़ी
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मैं तल्ख़ी-ए-हयात से घबरा के पी गया
ग़म की सियाह रात से घबरा के पी गया
साग़र सिद्दीक़ी
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मर गए जिन के चाहने वाले
उन हसीनों की ज़िंदगी क्या है
साग़र सिद्दीक़ी
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मर गए जिन के चाहने वाले
उन हसीनों की ज़िंदगी क्या है
साग़र सिद्दीक़ी
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मौत कहते हैं जिस को ऐ 'साग़र'
ज़िंदगी की कोई कड़ी होगी
साग़र सिद्दीक़ी
मुस्कुराओ बहार के दिन हैं
गुल खिलाओ बहार के दिन हैं
साग़र सिद्दीक़ी
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मुस्कुराओ बहार के दिन हैं
गुल खिलाओ बहार के दिन हैं
साग़र सिद्दीक़ी
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