नग़्मों की इब्तिदा थी कभी मेरे नाम से
अश्कों की इंतिहा हूँ मुझे याद कीजिए
साग़र सिद्दीक़ी
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रंग उड़ने लगा है फूलों का
अब तो आ जाओ! वक़्त नाज़ुक है
साग़र सिद्दीक़ी
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रंग उड़ने लगा है फूलों का
अब तो आ जाओ! वक़्त नाज़ुक है
साग़र सिद्दीक़ी
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तक़दीर के चेहरे की शिकन देख रहा हूँ
आईना-ए-हालात है दुनिया तेरी क्या है
साग़र सिद्दीक़ी
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तुम गए रौनक़-ए-बहार गई
तुम न जाओ बहार के दिन हैं
साग़र सिद्दीक़ी
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ये किनारों से खेलने वाले
डूब जाएँ तो क्या तमाशा हो
साग़र सिद्दीक़ी
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ज़िंदगी जब्र-ए-मुसलसल की तरह काटी है
जाने किस जुर्म की पाई है सज़ा याद नहीं
साग़र सिद्दीक़ी
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