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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

अब्र का साया ओ सब्ज़ा राह का
जान-ए-मन रथ की सवारी याद है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़




जो कहिए उस के हक़ में कम है बे-शक
परी है हूर है रूह-उल-अमीं है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़




जो कहिए उस के हक़ में कम है बे-शक
परी है हूर है रूह-उल-अमीं है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़




करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़'
मिरा साजन बहार-ए-अंजुमन है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़




मैं ने कहा कि घर चलेगी मेरे साथ आज
कहने लगी कि हम सूँ न कर बात तू बुरी

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़




मैं ने कहा कि घर चलेगी मेरे साथ आज
कहने लगी कि हम सूँ न कर बात तू बुरी

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़




पानी होवे आरसी उस मुख को देख
ज़ोहरा उसे क्या कि इक़ामत करे

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़