अब्र का साया ओ सब्ज़ा राह का
जान-ए-मन रथ की सवारी याद है
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
जो कहिए उस के हक़ में कम है बे-शक
परी है हूर है रूह-उल-अमीं है
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
जो कहिए उस के हक़ में कम है बे-शक
परी है हूर है रूह-उल-अमीं है
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़'
मिरा साजन बहार-ए-अंजुमन है
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
मैं ने कहा कि घर चलेगी मेरे साथ आज
कहने लगी कि हम सूँ न कर बात तू बुरी
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
मैं ने कहा कि घर चलेगी मेरे साथ आज
कहने लगी कि हम सूँ न कर बात तू बुरी
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
पानी होवे आरसी उस मुख को देख
ज़ोहरा उसे क्या कि इक़ामत करे
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

