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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

शेर में साथ रवानी के मआनी भी तो भर
ऐ 'सदा' क़ैद तू कूज़े में समुंदर कर दे

सदा अम्बालवी




तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना
अपनी तदबीर से तक़दीर बनाते जाओ

सदा अम्बालवी




उन्हें न तोलिये तहज़ीब के तराज़ू में
घरों में उन के न चूल्हे न दीप जलते हैं

सदा अम्बालवी




वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
दर्द कुछ होते हैं ता-उम्र रुलाने वाले

सदा अम्बालवी




वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
दर्द कुछ होते हैं ता-उम्र रुलाने वाले

सदा अम्बालवी




वक़्त के साथ 'सदा' बदले तअल्लुक़ कितने
तब गले मिलते थे अब हाथ मिलाया न गया

सदा अम्बालवी




वो तो ख़ुश्बू है हर इक सम्त बिखरना है उसे
दिल को क्यूँ ज़िद है कि आग़ोश में भरना है उसे

सदा अम्बालवी