वो तो ख़ुश्बू है हर इक सम्त बिखरना है उसे
दिल को क्यूँ ज़िद है कि आग़ोश में भरना है उसे
सदा अम्बालवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
अपने गले पे चलती छुरी का भी ध्यान रख
वो तेज़ है या कुंद ज़रा धार देख ले
सादिक़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
फ़ुर्सत हो तो ये जिस्म भी मिट्टी में दबा दो
लो फिर मैं ज़माँ और मकाँ से निकल आया
सादिक़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
गुमाँ न था कि लिफ़ाफ़े में ख़त के बदले वो
लहू-लुहान तड़पती ज़बान रख देगा
सादिक़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
गुमाँ न था कि लिफ़ाफ़े में ख़त के बदले वो
लहू-लुहान तड़पती ज़बान रख देगा
सादिक़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
इस घूमती ज़मीन का मेहवर ही तोड़ दो
बे-कार गर्दिशों पे ख़फ़ा हो रहे हूँ क्यूँ
सादिक़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
काट आगाहियों की फ़स्ल मगर
ज़ेहन में कुछ नए सवाल उगा
सादिक़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

