नूह बैठे हैं चारपाई पर
चारपाई पे नूह बैठे हैं
नूह नारवी
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पामाल हो के भी न उठा कू-ए-यार से
मैं उस गली में साया-ए-दीवार हो गया
नूह नारवी
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पूरी न अगर हो तो कोई चीज़ नहीं है
निकले जो मिरे दिल से तो हसरत है बड़ी चीज़
नूह नारवी
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साक़ी जो दिल से चाहे तो आए वो ज़माना
हर शख़्स हो शराबी हर घर शराब-ख़ाना
नूह नारवी
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सत्या-नास हो गया दिल का
इश्क़ ने ख़ूब की उखाड़-पछाड़
नूह नारवी
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शर्मा के बिगड़ के मुस्कुरा कर
वो छुप रहे इक झलक दिखा कर
नूह नारवी
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सुनते रहे हैं आप के औसाफ़ सब से हम
मिलने का आप से कभी मौक़ा नहीं मिला
नूह नारवी
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