मिरा साया मिरे बस में नहीं है
मगर दुनिया पे दावा कर रहा हूँ
नवीन सी. चतुर्वेदी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
नए सफ़र का हर इक मोड़ भी नया था मगर
हर एक मोड़ पे कोई सदाएँ देता था
नवीन सी. चतुर्वेदी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
परसों मैं बाज़ार गया था दर्पन लेने की ख़ातिर
क्या बोलूँ दूकान पे ही मैं शर्म के मारे गड़ बैठा
नवीन सी. चतुर्वेदी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
प्यास को प्यार करना था केवल
एक अक्षर बदल न पाए हम
नवीन सी. चतुर्वेदी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपना बादल तलाशने के लिए
उमर भर धूप में नहाए हम
नवनीत शर्मा
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
चोट खाए हुए लम्हों का सितम है कि उसे
रूह के चेहरे पे दिखते हैं मुहाँसे कितने
नवनीत शर्मा
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
एक तस्वीर को हटाया बस
दिल की दीवार ख़ाली ख़ाली है
नवनीत शर्मा
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

