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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

करना है शाइरी अगर 'नौशाद'
'मीर' का कुल्लियात याद करो

नौशाद अली




सामने उस के एक भी न चली
दिल में बातें हज़ार ले के चले

नौशाद अली




ज़िंदगी मुख़्तसर मिली थी हमें
हसरतें बे-शुमार ले के चले

नौशाद अली




शिकस्त ओ फ़त्ह मियाँ इत्तिफ़ाक़ है लेकिन
मुक़ाबला तो दिल-ए-ना-तवाँ ने ख़ूब किया

नवाब मोहम्मद यार ख़ाँ अमीर




दिल पर तेरी चुप से लगने वाला दाग़
ऐसा दाग़ है जिस को धो नहीं सकता मैं

नवेद रज़ा




जुदा हुए तो जुदाई में ये कमाल भी था
कि उस से राब्ता टूटा भी था बहाल भी था

नवेद रज़ा




मैं ख़ुद को दूसरों से क्या जुदा करूँ
बहुत मिला-जुला दिया गया मुझे

नवेद रज़ा