करना है शाइरी अगर 'नौशाद'
'मीर' का कुल्लियात याद करो
नौशाद अली
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सामने उस के एक भी न चली
दिल में बातें हज़ार ले के चले
नौशाद अली
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ज़िंदगी मुख़्तसर मिली थी हमें
हसरतें बे-शुमार ले के चले
नौशाद अली
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शिकस्त ओ फ़त्ह मियाँ इत्तिफ़ाक़ है लेकिन
मुक़ाबला तो दिल-ए-ना-तवाँ ने ख़ूब किया
नवाब मोहम्मद यार ख़ाँ अमीर
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दिल पर तेरी चुप से लगने वाला दाग़
ऐसा दाग़ है जिस को धो नहीं सकता मैं
नवेद रज़ा
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जुदा हुए तो जुदाई में ये कमाल भी था
कि उस से राब्ता टूटा भी था बहाल भी था
नवेद रज़ा
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मैं ख़ुद को दूसरों से क्या जुदा करूँ
बहुत मिला-जुला दिया गया मुझे
नवेद रज़ा
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