ये सोच कर भी हँस न सके हम शिकस्ता-दिल
यारान-ए-ग़म-गुसार का दिल टूट जाएगा
नरेश कुमार शाद
ज़िंदगी से तो ख़ैर शिकवा था
मुद्दतों मौत ने भी तरसाया
नरेश कुमार शाद
सुना है फूल झड़े थे जहाँ तिरे लब से
वहाँ बहार उतरती है रोज़ शाम के साथ
नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी
तिरे ख़याल से रौशन है सर-ज़मीन-ए-सुख़न
कि जैसे ज़ीनत-ए-शब हो मह-ए-तमाम के साथ
नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी
मैं रुक गया चढ़ी हुई नद्दी के सामने
कुछ वक़्त मेरे पास था बरसात के लिए
नसीम अब्बासी
मैं ने देखी है अमीर-ए-शहर की वो मुफ़्लिसी
दौलत-ए-दुनिया थी लेकिन ग़म का सरमाया न था
नसीम अंसारी
मैं रौशनी पे ज़िंदगी का नाम लिख के आ गया
उसे मिटा मिटा के ये सियाह रात थक गई
नसीम अंसारी

