उधर चुटकी वो दिल में ले रहे हैं
इधर इक गुदगुदी सी हो रही है
मुबारक अज़ीमाबादी
उस गली में हज़ार ग़म टूटा
आना जाना मगर नहीं छूटा
मुबारक अज़ीमाबादी
ये ग़म-कदा है इस में 'मुबारक' ख़ुशी कहाँ
ग़म को ख़ुशी बना कोई पहलू निकाल के
मुबारक अज़ीमाबादी
ये घटा ऐसी घटा इतनी घटा
मय हलाल ऐसे में है मय-ख़्वार को
मुबारक अज़ीमाबादी
ये तसर्रुफ़ है 'मुबारक' दाग़ का
क्या से क्या उर्दू ज़बाँ होती गई
मुबारक अज़ीमाबादी
मैं अपने आप लड़ूँगा समुंदरों से जंग
अब ए'तिमाद मुझे अपने नाख़ुदा पे नहीं
मुबीन मिर्ज़ा
'आज़ुर्दा' मर के कूचा-ए-जानाँ में रह गया
दी थी दुआ किसी ने कि जन्नत में घर मिले
मुफ़्ती सदरुद्दीन आज़ुर्दा

