तर्क-ए-तअल्लुक़ात का कुछ उन को ग़म नहीं
हम तो शिकस्त-ए-अहद-ए-वफ़ा से मलूल हैं
मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी
उन की निगाह-ए-लुत्फ़ की तासीर क्या कहूँ
ज़र्रे को आफ़्ताब बना कर चले गए
मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी
उन्हें ख़ुदा का अमल शर्मसार कर देगा
बिछा रहे हैं जो काँटे किसी की राहों में
मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी
वज्ह-ए-सुकूँ न बन सकीं हुस्न की दिल-नवाज़ियाँ
बढ़ गईं और उलझनें तुम ने जो मुस्कुरा दिया
मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी
अभी दिखाओ न तस्वीर-ए-ज़िंदगी इस को
ये बचपना है अभी मुस्कुराना चाहता है
मुजाहिद फ़राज़
फ़साद, क़त्ल, तअस्सुब, फ़रेब, मक्कारी
सफ़ेद-पोशों की बातें हैं क्या बताऊँ मैं
मुजाहिद फ़राज़
मुझे क्या मिला है बताऊँ क्या
मुझे क्या दिया है सुनाऊँ क्या
मुकेश आलम

