अब तो चुप-चाप शाम आती है
पहले चिड़ियों के शोर होते थे
मोहम्मद अल्वी
अभी दो चार ही बूँदें गिरीं हैं
मगर मौसम नशीला हो गया है
मोहम्मद अल्वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अच्छे दिन कब आएँगे
क्या यूँ ही मर जाएँगे
मोहम्मद अल्वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ऐसा हंगामा न था जंगल में
शहर में आए तो डर लगता था
मोहम्मद अल्वी
टैग:
| Shahr |
| 2 लाइन शायरी |
'अल्वी' ख़्वाहिश भी थी बाँझ
जज़्बा भी ना-मर्द मिला
मोहम्मद अल्वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
'अल्वी' ने आज दिन में कहानी सुनाई थी
शायद इसी वजह से मैं रस्ता भटक गया
मोहम्मद अल्वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
मोहम्मद अल्वी

