सय्याद ओ बाग़बाँ में बहुत होती है सलाह
ऐसा न हो कहीं गुल ओ बुलबुल में जंग हो
लाला माधव राम जौहर
शरारत दिल में उस बुत के भरी है
इसी पत्थर में हैं लाखों शरर बंद
लाला माधव राम जौहर
सीने से लिपटो या गला काटो
हम तुम्हारे हैं दिल तुम्हारा है
लाला माधव राम जौहर
सुख़न-ए-सख़्त से दिल पहले ही तुम तोड़ चुके
अब अगर बात बनाओ भी तो क्या होता है
लाला माधव राम जौहर
सुनसान कर दिया मिरे पहलू को ले के दिल
ज़ालिम ने लूट कर मिरी बस्ती तबाह की
लाला माधव राम जौहर
सुनता हूँ मैं कि आज वो तशरीफ़ लाएँगे
अल्लाह सच करे कहीं झूटी ख़बर न हो
लाला माधव राम जौहर
सू-ए-काबा चलूँ कि जानिब-ए-दैर
इस दो-राहे पे दिल भटकता है
लाला माधव राम जौहर

