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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

रोने पे अगर आऊँ तो दरिया को डुबो दूँ
क़तरा कोई समझे न मिरे दीदा-ए-नम को

लाला माधव राम जौहर




सब के लिए जहान में अब्र-ए-करम हैं वो
चारों तरफ़ बरसते हैं इक बूँद इधर नहीं

लाला माधव राम जौहर




सब को महफ़िल में नसीब उन के नज़ारे होंगे
हम कहीं ग़श में पड़े एक किनारे होंगे

लाला माधव राम जौहर




सदमे उठाएँ रश्क के कब तक जो हो सो हो
या तो रक़ीब ही नहीं या आज हम नहीं

लाला माधव राम जौहर




समझा लिया फ़रेब से मुझ को तो आप ने
दिल से तो पूछ लीजिए क्यूँ बे-क़रार है

लाला माधव राम जौहर




सर फोड़ के मर जाएँगे बदनाम करेंगे
जिस काम से डरते हो वही काम करेंगे

लाला माधव राम जौहर




सौदा-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार में है तल्ख़ ज़िंदगी
ये ज़हर हम ने मोल लिया साँप पाल के

लाला माधव राम जौहर