छोटी ही उम्र में अल्लाह वज़ीफ़ा इतना
अभी क्या सिन है जो पढ़ते हो बला की तस्बीह
लाला माधव राम जौहर
चुप रहो क्यूँ मिज़ाज पूछते हो
हम जिएँ या मरें तुम्हें क्या है
लाला माधव राम जौहर
चुपका खड़ा हुआ हूँ किधर जाऊँ क्या करूँ
कुछ सूझता नहीं है मोहब्बत की राह में
लाला माधव राम जौहर
चुटकियों में तुम उड़ा दोगे हवा पर हो सवार
तुम से क्या ख़ाक कहे दिल की तमन्ना कोई
लाला माधव राम जौहर
दर्द-ए-दिल कहते हुए बज़्म में आता है हिजाब
तख़लिया हो तो कुछ अहवाल सुनाएँ तुझ को
लाला माधव राम जौहर
दें जिसे चाहें दिल हमारा है
इस में क्या आप का इजारा है
लाला माधव राम जौहर
देखा हुज़ूर को जो मुकद्दर तो मर गए
हम मिट गए जो आप ने मैली निगाह की
लाला माधव राम जौहर

