देखिए क्या दिखाती है तक़दीर
चुप खड़ा हूँ गुनाहगारों में
लाला माधव राम जौहर
ढूँड लेंगे जब कोई तुम सा तभी चैन आएगा
हम भी अपनी फ़िक्र में रहते हैं कुछ ग़ाफ़िल नहीं
लाला माधव राम जौहर
दिल के मुआमले में मुझे दख़्ल कुछ नहीं
इस के मिज़ाज में जिधर आए उधर रहे
लाला माधव राम जौहर
दिल में आओ मज़े हों जीने के
खोल दूँ मैं किवाड़ सीने के
लाला माधव राम जौहर
दिल में ख़ाक उड़ती है कहने को बड़े हैं ज़ाहिद
मक्र का विर्द है पढ़ते हैं रिया की तस्बीह
लाला माधव राम जौहर
दिल में रहते जो मिरे और ही कुछ हो जाते
ये वो काबा है कि बुत जिस में ख़ुदा होते हैं
लाला माधव राम जौहर
दिल में तेरे चेहरा-ए-पुर-नूर को करता हूँ याद
इश्क़-ए-गेसू में हुआ करता है सौदा रात को
लाला माधव राम जौहर

