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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हो गया मेहमाँ-सरा-ए-कसरत-ए-मौहूम आह
वो दिल-ए-ख़ाली कि तेरा ख़ास ख़ल्वत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




जान से हो गए बदन ख़ाली
जिस तरफ़ तू ने आँख भर देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




जग में आ कर इधर उधर देखा
तू ही आया नज़र जिधर देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




जी की जी ही में रही बात न होने पाई
हैफ़ कि उस से मुलाक़ात न होने पाई

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




काश उस के रू-ब-रू न करें मुझ को हश्र में
कितने मिरे सवाल हैं जिन का नहीं जवाब

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




कहते न थे हम 'दर्द' मियाँ छोड़ो ये बातें
पाई न सज़ा और वफ़ा कीजिए उस से

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




कमर ख़मीदा नहीं बे-सबब ज़ईफ़ी में
ज़मीन ढूँडते हैं वो मज़ार के क़ाबिल

ख़्वाजा मीर 'दर्द'