कौन सी दुनिया में हूँ किस की निगहबानी में हूँ
ज़िंदगी है सख़्त मुश्किल फिर भी आसानी में हूँ
कौसर मज़हरी
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मैं सब के वास्ते अच्छा था लेकिन
उसी के वास्ते अच्छा नहीं था
कौसर मज़हरी
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मौसम-ए-दिल जो कभी ज़र्द सा होने लग जाए
अपना दिल ख़ून करो फूल उगाने लग जाओ
कौसर मज़हरी
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नज़र झुक रही है ख़मोशी है लब पर
हया है अदा है कि अन-बन है क्या है
कौसर मज़हरी
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पुतलियों पर रक़्स करना ही कमाल-ए-फ़न नहीं
दर्द के आँसू को तो पैहम रवानी चाहिए
कौसर मज़हरी
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रब्त है उस को ज़माने से बहुत सुनता हूँ
कोई तरकीब करूँ मैं भी ज़माना हो जाऊँ
कौसर मज़हरी
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तआक़ुब में है मेरे याद किस की
मैं किस को भूल जाना चाहता हूँ
कौसर मज़हरी
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