EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

जिस दिल को तुम ने लुत्फ़ से अपना बना लिया
उस दिल में इक छुपा हुआ नश्तर ज़रूर था

जिगर मुरादाबादी




जिसे सय्याद ने कुछ गुल ने कुछ बुलबुल ने कुछ समझा
चमन में कितनी मानी-ख़ेज़ थी इक ख़ामुशी मिरी

जिगर मुरादाबादी




जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं

जिगर मुरादाबादी




जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है
अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है

जिगर मुरादाबादी




जुनून-ए-मोहब्बत यहाँ तक तो पहुँचा
कि तर्क-ए-मोहब्बत किया चाहता हूँ

जिगर मुरादाबादी




कभी शाख़ ओ सब्ज़ा ओ बर्ग पर कभी ग़ुंचा ओ गुल ओ ख़ार पर
मैं चमन में चाहे जहाँ रहूँ मिरा हक़ है फ़स्ल-ए-बहार पर

जिगर मुरादाबादी




कभी उन मद-भरी आँखों से पिया था इक जाम
आज तक होश नहीं होश नहीं होश नहीं

जिगर मुरादाबादी