एक मौसम की कसक है दिल में दफ़्न
मीठा मीठा दर्द सा है मुस्तक़िल
इफ़्तिख़ार राग़िब
इक बड़ी जंग लड़ रहा हूँ मैं
हँस के तुझ से बिछड़ रहा हूँ मैं
इफ़्तिख़ार राग़िब
इंकार ही कर दीजिए इक़रार नहीं तो
उलझन ही में मर जाएगा बीमार नहीं तो
इफ़्तिख़ार राग़िब
इस शोख़ी-ए-गुफ़्तार पर आता है बहुत प्यार
जब प्यार से कहते हैं वो शैतान कहीं का
इफ़्तिख़ार राग़िब
जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़
हालात कर रहे हैं हालात के मुताबिक़
इफ़्तिख़ार राग़िब
किस किस को बताऊँ कि मैं बुज़दिल नहीं 'राग़िब'
इस दौर में मफ़्हूम-ए-शराफ़त ही अलग है
इफ़्तिख़ार राग़िब
क्या बताऊँ दिल में किस की याद का
एक काँटा चुभ रहा है मुस्तक़िल
इफ़्तिख़ार राग़िब

