पहुँचे उस को सलाम मेरा
भूले से न ले जो नाम मेरा
हफ़ीज़ जौनपुरी
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परी थी कोई छलावा थी या जवानी थी
कहाँ ये हो गई चम्पत झलक दिखा के मुझे
हफ़ीज़ जौनपुरी
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पी कर दो घूँट देख ज़ाहिद
क्या तुझ से कहूँ शराब क्या है
हफ़ीज़ जौनपुरी
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पी लो दो घूँट कि साक़ी की रहे बात 'हफ़ीज़'
साफ़ इंकार से ख़ातिर-शिकनी होती है
हफ़ीज़ जौनपुरी
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क़सम निबाह की खाई थी उम्र भर के लिए
अभी से आँख चुराते हो इक नज़र के लिए
हफ़ीज़ जौनपुरी
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सच है इस एक पर्दे में छुपते हैं लाख ऐब
यानी जनाब-ए-शैख़ की दाढ़ी दराज़ है
हफ़ीज़ जौनपुरी
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शब-ए-विसाल लगाया जो उन को सीने से
तो हँस के बोले अलग बैठिए क़रीने से
हफ़ीज़ जौनपुरी
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