तमसील ओ इस्तिआरा ओ तश्बीह सब दुरुस्त
उस की मिसाल क्या जो अदीम-उल-मिसाल हो
हफ़ीज़ जौनपुरी
तंदुरुस्ती से तो बेहतर थी मिरी बीमारी
वो कभी पूछ तो लेते थे कि हाल अच्छा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
थे चोर मय-कदे के मस्जिद के रहने वाले
मय से भरा हुआ है जो ज़र्फ़ है वज़ू का
हफ़ीज़ जौनपुरी
उन की यकताई का दावा मिट गया
आइने ने दूसरा पैदा किया
हफ़ीज़ जौनपुरी
याद आईं उस को देख के अपनी मुसीबतें
रोए हम आज ख़ूब लिपट कर रक़ीब से
हफ़ीज़ जौनपुरी
ज़ाहिद को रट लगी है शराब-ए-तुहूर की
आया है मय-कदे में तो सूझी है दूर की
हफ़ीज़ जौनपुरी
ज़ाहिद शराब-ए-नाब हो या बादा-ए-तुहूर
पीने ही पर जब आए हराम ओ हलाल क्या
हफ़ीज़ जौनपुरी

