हमें याद रखना हमें याद करना
अगर कोई ताज़ा सितम याद आए
हफ़ीज़ जौनपुरी
हसीनों से फ़क़त साहिब-सलामत दूर की अच्छी
न उन की दोस्ती अच्छी न उन की दुश्मनी अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
इस को समझो न ख़त्त-ए-नफ़्स 'हफ़ीज़'
और ही कुछ है शाएरी से ग़रज़
हफ़ीज़ जौनपुरी
जब मिला कोई हसीं जान पर आफ़त आई
सौ जगह अहद-ए-जवानी में तबीअत आई
हफ़ीज़ जौनपुरी
जब न था ज़ब्त तो क्यूँ आए अयादत के लिए
तुम ने काहे को मिरा हाल-ए-परेशाँ देखा
हफ़ीज़ जौनपुरी
जो दीवानों ने पैमाइश की है मैदान-ए-क़यामत की
फ़क़त दो गज़ ज़मीं ठहरी वो मेरे दश्त-ए-वहशत की
हफ़ीज़ जौनपुरी
जो काबे से निकले जगह दैर में की
मिले इन बुतों को मकाँ कैसे कैसे
हफ़ीज़ जौनपुरी

