तेरे कूचे में है सकूँ वर्ना
हर ज़मीं आसमान है प्यारे
हफ़ीज़ जालंधरी
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उस की सूरत को देखता हूँ मैं
मेरी सीरत वो देखता ही नहीं
हफ़ीज़ जालंधरी
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उठ उठ के बैठ बैठ चुकी गर्द राह की
यारो वो क़ाफ़िले थके हारे कहाँ गए
हफ़ीज़ जालंधरी
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उतरेंगे किस के हल्क़ से ये दिल-ख़राश घूँट
किस को पयाम दूँ कि मिरे साथ आ के पी
हफ़ीज़ जालंधरी
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वफ़ा का लाज़मी था ये नतीजा
सज़ा अपने किए की पा रहा हूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
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वफ़ाओं के बदले जफ़ा कर रहे हैं
मैं क्या कर रहा हूँ वो क्या कर रहे हैं
हफ़ीज़ जालंधरी
वो सरख़ुशी दे कि ज़िंदगी को शबाब से बहर-याब कर दे
मिरे ख़यालों में रंग भर दे मिरे लहू को शराब कर दे
हफ़ीज़ जालंधरी
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