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4 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

4 लाइन शायरी

446 शेर

और होंगे तिरी महफ़िल से उभरने वाले
हज़रत-ए-'दाग़' जहाँ बैठ गए बैठ गए

others might dedide to depart from your domain
but once 'Daag' settles down there shall he remain

दाग़ देहलवी




अयादत को मिरी आ कर वो ये ताकीद करते हैं
तुझे हम मार डालेंगे नहीं तो जल्द अच्छा हो

Visiting my sick bed she, makes this threat to me
I will kill you if you don't get well speedily

दाग़ देहलवी




डरता हूँ देख कर दिल-ए-बे-आरज़ू को मैं
सुनसान घर ये क्यूँ न हो मेहमान तो गया

I'm fearful when I see this heart so hopeless and forlorn
why shouldn't this home be desolate, as the guest has gone

दाग़ देहलवी




दी मुअज़्ज़िन ने शब-ए-वस्ल अज़ाँ पिछले पहर
हाए कम्बख़्त को किस वक़्त ख़ुदा याद आया

as I was meeting my beloved there was a call to prayer
that cursed priesthad to think of God just then and there?

दाग़ देहलवी




दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे
जो रंज की घड़ी भी ख़ुशी से गुज़ार दे

a heart O lord if you bestow, one such it should be
that smilingly I may spend my time of misery

दाग़ देहलवी




दिल ही तो है न आए क्यूँ दम ही तो है न जाए क्यूँ
हम को ख़ुदा जो सब्र दे तुझ सा हसीं बनाए क्यूँ

a heart it is why wont it yearn, life it is why wont it end
if god denies me patience then, why your beauty

दाग़ देहलवी




दिल का क्या हाल कहूँ सुब्ह को जब उस बुत ने
ले के अंगड़ाई कहा नाज़ से हम जाते हैं

how to describe my state when at the crack of dawn
she stretched in lagour and said it was time to be gone

दाग़ देहलवी