हस्ती का राज़ क्या है ग़म-ए-हस्त-ओ-बूद है
आलम तमाम दाम-ए-रुसूम-ओ-क़़ुयूद है
फ़रहत कानपुरी
ढूँडेंगे हर इक चीज़ में जीने की उमंगें
दिल की किसी ख़्वाहिश को भी मारेंगे नहीं हम
फ़रहत नदीम हुमायूँ
दिल ऐसा मकाँ है जो अगर टूट गया तो
लग जाएँगी सदियाँ नई तामीर में लिख दे
फ़रहत नदीम हुमायूँ
मेरा हर ख़्वाब तो बस ख़्वाब ही जैसा निकला
क्या किसी ख़्वाब की ताबीर भी हो सकती है
फ़रहत नदीम हुमायूँ
मिलना है अगर ख़ुद से तो फिर देर न करना
खो जाने का डर होता है ताख़ीर में लिख दे
फ़रहत नदीम हुमायूँ
नहीं होती है राह-ए-इश्क़ में आसान मंज़िल
सफ़र में भी तो सदियों की मसाफ़त चाहिए है
फ़रहत नदीम हुमायूँ
तिरा दीदार हो आँखें किसी भी सम्त देखें
सो हर चेहरे में अब तेरी शबाहत चाहिए है
फ़रहत नदीम हुमायूँ

